कुंभ मेला क्यों आयोजित किया जाता है? I kumbh mela meaning

Pankaj Thakur
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दोस्तों आज के इस लेख में आपको मैं कुंभ मेला के बारे में बतऊँगा। अगर आप भी इछुक हैं। तो आप सही जगह पर आये है चलिए कुम्भ मेले से सम्भंदित कुछ रोचक तथ्य आपको बताते हैं।

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कुंभ मेला क्यों आयोजित किया जाता है? I kumbh mela meaning

कुंभ मेला। Kumbh Mela

Kumbh Mela:- आज हम आपको कुंभ मेला (Kumbh Mela) का इतिहास, महत्व और कुंभ से जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताने जा रहे हैं। कुंभ पर्व हिन्दू धर्म का एक महत्तपूर्ण पर्व है। कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता हैं। इसका पार्याय पवित्र कलश से होता हैं। इस कलश का हिन्दू सभ्यता में विशेष महत्व हैं। कलश के मुख को भगवान विष्णु, गर्दन को रूद्र, आधार को ब्रम्हा, बीच के भाग को समस्त देवियों और अंदर के जल को संपूर्ण सागर का प्रतीक माना जाताहैं। यह चारों वेदों का संगम हैं। इस पर्व का संबध समुंद्र मंथन से है तो इसलिए इसका अर्थ घड़ा भी होता हैं।

कुंभ का इतिहास। History of Kumbh mela 

कुंभ का इतिहास 850 साल पुराना हैं। माना जाता है कि कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से हो गई थी। ऐसा कहा जाता है कि एक बार इन्द्र देवता ने महर्षि दुर्वासा से रास्ते में मिले। मिलने पर महर्षि दुर्वासा ने उन्हें अपनी माला दी, लेकिन इन्द्र ने उस माला को अपने ऐरावत हाथी के मस्तक पर डाल दिया। इस पर दुर्वासाजी ने क्रोधित होकर इन्द्र की ताकत खत्म करने का श्राप दे दिया. तब इंद्र अपनी ताकत हासिल करने के लिए भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें विष्णु भगवान की प्रार्थना करने की सलाह दी, तब भगवान विष्णु ने क्षीरसागर का मंथन करके अमृत निकालने की सलाह दी. भगवान विष्णु के ऐसा कहने पर संपूर्ण देवता दैत्यों के साथ संधि करके अमृत निकालने के यत्न में लग गए.

समुद्र मंथन के दौरान पहले विष निकला जिसे पहले शिव जी ने पी लिया। जब मंथन में अमृत दिखाई पड़ा तो उसे निकला गया। वह था अमृत, उसे पाने के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष हुआ। देवता, शैतानों के गलत इरादे समझ गए, असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया. असुरों ने जब गरुड़ से वह पात्र छीनने का प्रयास किया तो उस पात्र में से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिरीं. तभी से प्रत्येक 12 वर्षों के अंतराल पर इन स्थानों पर कुम्भ कुम्भ मेला आयोजित किया जाता हैं।

कुंभ मेला क्यों मनाया जाता हैं?

Kumbh Mela :- ग्रंथों ओर लेखों के अनुसार इस दिन को विशेष मंगलकारी माना जाता हैं। ऐसा माना जाता है कि कुंभ मे स्नान करने से लोगो के पाप धुल जाते है। और आत्मा को स्वर्ग कि प्राप्ति सहजता से है जाती है।

कहा ओर कब मनाया जाता है?

यह मेला उत्तर प्रदेश के नाशिक में गोदावरी नदी के किनारे, उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे, हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे प्रयाग मे गंगा, यमुनाऔर सरस्वती नदी के संगम स्थल पर मनाया जाता है। कुंभ मेला प्रति बारह वर्ष बाद मनाया जाता है।

कुंभ का मेला 12 साल में क्यों लगता है?

शास्त्रों के अनुासर, पृथ्वीवासियों का एक साल देवताओं के लिए एक दिन के बराबर होता है। इस हिसाब से पृथ्वी की गणनाओं के अनुसार, देवताओं और असुर के बीच युद्ध 12 वर्ष तक चलता रहा। इस युद्ध की अवधि 12 साल थी इस वजह से 12 साल बाद के बाद कुंभ का आयोजन किया जाता है।

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